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Saturday, 26 March 2016

ढाई सालों में अभी तक किसी ने उर्दू में नहीं मांगी RTI: आरटीआई कमीश्नर

आगरा। यूपी आरटीआई कमीश्नर हाफिज मुहम्मद उस्मान एक प्रोग्राम के सिलसिले में बतौर मेहमाने खुसुसी के तौर पर आगरा शहर आये। इस मौके पर उन्होंने UPUKLive से सर्किट हाउस में बातचीत की। उन्होंने कहा कि मुझे इस ओहदे पर करीब ढाई साल हो गये हैं जबकि मेरे पास अभी तक कोई भी उर्दू में एप्लीकेशन नहीं आई यह बेहद अफसोस की बात है। 

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 एक ऐसा कानून है, जो एक आम आदमी का हथियार बन गया है। आम जनता को चाहिए कि वह इसका इस्तेमाल करते हुए अपना हक को हासिल करने की कोशिश करे। यह हथियार उसे हमारे आईन (संविधान) ने दिया है। इसकी हिफ़ाज़त और इसका सही इस्तेमाल हम सबकी जिम्मेदारी है।
यह आम आदमी का सबसे अच्छा हथियार है। इसे जितना इस्तेमाल करेंगे यह उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि आजकल आम आदमी को कोई भी हक लाठी, डण्डे से नहीं, न ही जोर-जबरदस्ती से लेने की कोशिश से नहीं मिलता। इसके लिए कानून का सहारा जरूरी है और यह सहारा है आरटीआई कानून। सहाफी के सवाल पर उन्होंने इस्लामिक फ़तवा और आरटीआई के बारे में मुख़्तलिफ़ किस्म का फरक़ बताया। 

फोटो- यूपी आरटीआई कमीश्नर हाफिज मुहम्मद उस्मान से बातचीत करते सिनियर जर्नलिस्ट अज़हर उमरी।

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