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Wednesday, 6 April 2016

उत्तराखंड और यूपी में 16 साल बाद हुआ यह समझौता जाने…





देहरादून। उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद पहली बार उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ है जिसमें उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अड़ंगा लगाने से हर बार करार की कवायद बेकार चली जाती थी।  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 16 साल बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिवहन निगम ने समझौता कर लिया है।  इस समझौते से बसों के फेरे में कमी होगी और परमिट न होने के कारण उत्तराखंड की बसों को उत्तर प्रदेश में रोका नहीं जाएगा।






उत्तराखंड के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली आदि प्रांतों में इस समझौते के लिए कई मुहिम चलाई गई। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के परिवहन निगम के प्रबंध निदेशकों की मंगलवार को लखनऊ में हुई बैठक सफल रही और दोनों प्रदेशों में समझौता हो गया है। उत्तराखंड परिवहन निगम के एमडी बृजेश संत और उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के एमडी के. रवींद्र नायक ने अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि दोनों प्रदेशों के निगमों के बीच 15 फीसदी बस फेरे बढ़ाने की सहमति बनी है।
इस समझौते के बाद रोज उत्तर प्रदेश की 2472 बसें और उत्तराखंड की 1725 बसें एक दूसरे के राज्यों में जाएंगी। यह समझौता होने से पहले उत्तर प्रदेश की 2150 बसें और उत्तराखंड की 1500 बसें रोजाना एक दूसरे के राज्यों में जाती थी। वहीं उत्तर प्रदेश की बसें उत्तराखंड में 1 लाख 12 हजार किमी और उत्तराखंड की बसें उत्तर प्रदेश में 2 लाख 40 हजार किमी का सफर तय करेंगी। दोनों राज्यों में अभी बसों की समय सारिणी निर्धारित नहीं हुई हैं। दोनों प्रदेशों में बस ले जाने के लिए कुछ प्रबंध निदेशकों के तहत परमिट जारी किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने यह समझौता होने पर ख़ुशी जाहिर की है।

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