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Tuesday, 12 April 2016

लड़की ने कहा- हां, मुरथल में मेरे साथ भी हुआ था रेप





हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर जाटों द्वारा किए गए हिंसक आंदोलन के दौरान सामने आए बहुचर्चित मुरथल कांड में पुलिस ने एफआईआर में महिलाओं के साथ गैंगरेप की धाराएं भी दर्ज कर ली हैं. गैंगरेप की धाराएं तीन महिलाओं की ओर से दर्ज कराए गए बयान के आधार पर दर्ज की गई हैं. अपने बयानों में तीनों महिलाओं ने पुलिस को बताया है कि फरवरी में जब जाट आंदोलन पूरे चरम पर था उसी दौरान मुरथल में उनके साथ गैंगरेप किया गया.

तीन में से दो महिलाओं ने गुमनाम पत्र भेजकर 21 और 22 फरवरी को उनके साथ हुए बलात्कार की विस्तार पूर्वक जानकारी दी थी. इस केस में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की एमिकस क्यूरी के रूप में सहायता कर रहे वरिष्ठ वकील अनुपम गुप्ता ने कहा है कि उनके पास पूर्वी दिल्ली निवासी तीसरी पीड़ित लड़की की ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है. हालांकि, उन्होंने उस सबूत को अब तक अदालत के साथ साझा नहीं किया है.
एक पत्र, एक ऑस्ट्रेलियाई एनआरआई महिला द्वारा भेजा गया था, उस पत्र को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था. वहीं दूसरा पत्र फरीदाबाद पुलिस को प्राप्त हुआ था, जिसमें हॉस्टल में रहने वाली एक लड़की ने कथित तौर पर जाट आंदोलन के दौरान एनएच-1 पर बलात्कार करने के आरोप लगाए हैं.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब पुलिस ने मुरथल में घटित हुए कथित गंभीर अपराधों को स्वीकार किया है. हरियाणा की पुलिस महानिरीक्षक (दक्षिणी रेंज) और विशेष जांच दल (एसआईटी) का नेतृत्व कर रहीं ममता सिंह द्वारा दायर एक हलफनामे पर एक रिपोर्ट सौंपते हुए राज्य पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-1 पर घटी घटना के संबंध में 30 मार्च को दर्ज प्राथमिकी संख्या 118 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376-डी के तहत दुष्कर्म का मामला शामिल किया है.
एफआईआर में दुष्कर्म की धारा दिल्ली निवासी बॉबी जोशी की शिकायत के आधार पर जोड़ी गई है, जिनके मुताबिक जाट आंदोलनकारियों ने कथित तौर पर उनके साथ दुष्कर्म किया था. राज्य सरकार ने कहा कि उसके पास कुछ गुमनाम पत्र आए, जिसमें वहां दुष्कर्म की बात कही गई है.
गौरतलब है कि इस साल फरवरी में हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में जोर देकर कहा था कि जाटों के आंदोलन के दौरान सोनीपत जिले में दुष्कर्म या छेड़छाड़ जैसी कोई घटना नहीं घटी थी। सरकार ने इस संबंध में हाईकोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी.
कई महिलाओं के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म के आरोप के बाद हरियाणा सरकार द्वारा गठित एक एसआईटी ने जांच के बाद प्रारंभिक स्थिति रिपोर्ट सौंपी थी. इस दल में सभी अधिकारी महिलाएं थीं. एसआईटी की इस रिपोर्ट में कहा गया कि कथित सामूहिक दुष्कर्म या छेड़छाड़ की शिकायत करने के लिए कोई महिला सामने नहीं आई. दरअसल, मीडिया में आई सामूहिक दुष्कर्म की घटना की खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व पुलिस को एक स्थिति रिपोर्ट सौंपने को कहा था. इसके लिए वकील अनुपम गुप्ता को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया गया था.
हाईकोर्ट ने सोमवार को मनोहर लाल खट्टर सरकार से जाट हिंसा की घटनाओं को देखने के लिए प्रकाश सिंह कमेटी की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाया और इसके संवैधानिक व कानूनी स्थिति को स्पष्ट करने को कहा.  उल्लेखनीय है कि सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर नौ दिन चले जाट आंदोलन के दौरान कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 320 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

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