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Sunday, 10 April 2016

तंज़ील को सरकार ने शहीद का दर्जा इसलिए नहीं दिया क्योंकि वह एक मुस्लिम थे



नई दिल्ली।  एनआईए के अफसर तंज़ील अहमद की हत्या की जांच को अलग रंग दिया जा रहा है, जांच एजेंसियां ​​संम्पति का मामला बता रही हैं जबकि उनके रिश्तेदारों और भाई का कहना है कि उनकी कोई संपत्ति नहीं थी और न ही ऐसी कोई रंजिश थी। अगर उनकी संम्पति है तो जांच एजेंसियां ​​बताएं कि वह संपत्ति कहा है और कैसी रंजिश थी।

सदा ए भारत की रिपोर्ट के अनुसार ओखला के पूर्व कांग्रेसी विधायक आसिफ मोहम्मद खान ने जामिया नगर थाने में पुलिस द्वारा अपना संदेश ऊपर तक पहुंचाने को लेकर भीड़ को संबोधित कर रहे थे। असल में आज एनआईए अधिकारी तंज़ील अहमद की हत्या के कई दिन बीत गए लेकिन अब तक हत्यारों का कुछ पता नहीं लगा जिसकी वजह से लोगों में नाराजगी पढ़ती जा रही है और वही नाराज लोग आसिफ मोहम्मद खान के दाहिने हाथ मानेजाने वाले वहाब मालिक के अगवाई में तंज़ील अहमद के घर से ओखला हेड तक कैंडिल मार्च निकाला। मार्च में कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने भी कुछ दूर तक भाग लिया।

मार्च जैसे ही जामिया नगर थाना के पास पहुंचा उसके रुख को जामिया नगर थाना के अंदर मोड़ दिया गया और भीड़ अंदर आगई इसके बाद आसिफ मोहम्मद खान ने अपना भाषण शुरू किया।

उन्होंने अपने भाषण में कहा चूंकि तंज़ील अहमद इसी क्षेत्र में रहते थे और वह देश के एक बहादुर सिपाही थे और उन्होंने देश के लिए जान गंवाई है इस लिए हमें उनसे हमदरी है और आज हमारे बच्चों ने केंडल मार्च निकाला।

उन्होंने जामिया नगर पुलिस से कहा, मैं इसमें कोई राजनीति नहीं कर रहा हूं बस में यहाँ इसलिए संबोधित कर रहा हूं ताकि आप लोग हमारी बात को ऊपर तक पहुंचाएं और तंज़ील अहमद हत्या ममीले को ठीक तरह जाँच किया जाए। उन्होंने कहा कि तंज़ील अहमद को अभी तक सरकार की ओर से शहीद का दर्जा नहीं मिला क्यों, क्या वह एक मुसलमान थे इसलिए। क्या उन्होंने देश के खातिर बलिदान नहीं दिया ?
उन्होंने कहा अगर तंज़ील की जगह कोई अन्य गैर मुस्लिम अधिकारी की हत्या हुई होती तो अब तक मोदी सरकार किसी आतंकवादी संगठन से जोड़कर उन्हें शहीद का दर्जा दे चुकी होती। उन्होंने कहा जब तंज़ील अहमद का अंतिम संस्कार किया जा रहा था तो होम मिनिस्ट्री के और से एक भी व्यक्ति मौजूद नहीं था यह बड़े शर्म की बात है।

उन्होंने कहा, मैं सरकार को चेतना देता हूँ कि अगर जल्द से जल्द तंज़ील अहमद की हत्या मामिला ठीक तरह से आम जनता में खुलासा नहीं किया गया तो हम बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

आसिफ मोहमद खान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मोदी सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा इसलिए नहीं दिया क्योंकि वह एक मुस्लिम अधिकारी थे और अगर कोई गैर मुस्लिम अधिकारी होते तो उनको ऑफिशियल शहीद का दर्ज मिल चुका होता।

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