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Friday, 22 April 2016

एसओ से लेकर डीजीपी तक मदद की गुहार, पत्रकार को नही मिली पुलिस की सहायता


एटा- एक तरफ जहा सूबे के मुखिया अखलेश यादव पत्रकारों के हित की बात करते हुऐ हेल्प लाईन शुरू करके वाह वाह लूट रहे है तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश मे हो रहे गुंडा राज को रोकने मे सरकार और प्रशासन दोनों ही नाकामयाब  साबित हो रहें है लेकिन पत्रकारों पर हो रहे ज़ुल्म उत्तर प्रदेश के शासन की पोल खोलने के लिये काफ़ी है कानून व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की जब लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ ही सुरक्षित नही तो जनता की क्या ख़ाक सुरक्षित रहेगी।
 पत्रकार का गुनाह सिर्फ इतना था कि वो लोकतंत्र के सच्चे पहरी की भूमिका निभाकर समाज और प्रशासन को सच्चाई का आईना दिखाना चाहता था। खुलेआम हो रहे सट्टे की वीडियो रिकॉर्डिंग करना उसके लिए बहुत बड़ा अपराध हो गया। खुलेआम हो रहे सट्टे की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के बाद सटोरियों ने फायरिंग की। पत्रकार किसी तरह वहां से जान बचाकर भागा तो उसकी बाइक के पीछे कई वाहन लग लगे। उन वाहनों को चकमा देने में पत्रकार सफल हो गया तो स्थानीय पुलिस को सूचना देने के लिए पत्रकार ने कॉल की तो एसओ ने कॉल रिसीव नही की। लिहाजा पत्रकार ने 100 नंबर डायल करके कंट्रोल नंबर को घटना से अवगत कराया, लेकिन जब कोई हेल्प नही मिली तो एसएसपी को कॉल की, लेकिन एसएसपी ने भी कॉल रिसीव नही। इमरजेंसी में  न्याय एवं मदद की आस लेकर पत्रकार ने डीजीपी को कॉल की और मदद की गुहार लगाई एवं सारे घटनाक्रम से डीजीपी के पीआरओ को अवगत कराया। डीजीपी के पीआरओ ने मदद का आश्वासन दिया, लेकिन कई घंटे बीते जाने के बाबजूद पत्रकार को पुलिस प्रशासन की ओर से कोई मदद नही मिली।
ये सारा वाकया यूपी के एटा जनपद के मारहरा कसबे में पत्रकार अमन पठान के साथ हुआ है। घटनाक्रम में 100 प्रतिशत सच्चाई है। अब कोई आरोप कुछ भी लगाये। घटना घटित होने के बाद की सारी काल एवं वीडियो रिकॉर्डिंग पत्रकार अमन पठान के पास सुरक्षित हैं। सट्टा माफिया पत्रकार अमन पठान को पुलिस की मदद से जान से मार सकते हैं, लेकिन सच की आवाज को कभी दवा नही सकते हैं। एक अमन पठान के मरने के बाद सौ अमन पठान पैदा होंगे। जो सच का साथ देंगे।

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