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Sunday, 24 April 2016

जहाँ इंसानों के लिए पीने को पानी नहीं वहाँ बूंद-बूंद पानी जुटाकर गायों को पानी पिलाते है शमशाद



दिल्ली के देवली जैसे इलाके में इंसानों को पानी मुश्किल से मयस्सर है। यहां पानी माफियाओं का जाल फैला है। प्यास से बेचैन जनता पैसे देकर पानी खरीदने को मजबूर है। यहां प्यास से बेहाल सड़क पर चरने वाली गायें शमशाद का चेहरा देखती हैं। देवली के बी-ब्लॉक में एक साइकिल दुकान में काम करने वाला शमशाद शायद इन गायों के मन की बात समझता है।

लोग बताते हैं कि वह हर दिन तकरीबन 40 से 50 सड़कों पर घूमने वाली गायों को पानी पिलाता है। अपनी दुकान के बाहर उसने गायों के लिए विशेष प्रकार की थर्माकोल की दो टंकियां बना रखी हैं। इलाके में पानी की कमी पर पड़ताल करने गई संवाददाता ने अपनी आंखों से शमशाद का यह पहलू देखा। लोगों से पूछा, फिर शमशाद से बात की। उस पूरी घटना से जुड़ा वीडियो भी है।



यह करीब शाम के साढ़े चार बजे की बात है। बी-ब्लॉक तिराहे पर दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर पहुंचता है। टैंकर के रुकते ही आसपास के दुकानवाले अपने-अपने डिब्बे लेकर दौड़ पड़ते हैं। लोगों की कतार में एक गाय बार-बार पानी की धार में मुंह मारने की कोशिश करती है। पानी के प्रति गाय का उतावलापन देखकर पता चलता है कि वह चिलचिलाती धूप में प्यास से बेहाल है।

यहां पानी भर रहे लोग उसे पीछे करके खुद पानी भरने लगते हैं। उसी कतार में शायद चमड़े या रबड़ का बना एक टब लेकर शमशाद खड़ा हो जाता है। उसकी उम्र करीब 25-26 वर्ष है। सब लोग पानी भर-भरके आगे निकल लेते हैं। शमशाद अपना नंबर आते ही वह टब भरता है। उसे देखकर गाय उसकी दुकान की तरफ चली जाती है। टब भरकर वह सीधे गाय के पास पहुंचता है। गाय बिना देर लगाए तकरीबन पांच लीटर पानी पी जाती है।



अब शमशाद कोशिश में है कि वहां लगीं थर्माकोल की नादें भी भर जाएं। पूछने पर पता चलता है कि शमशाद हर दिन दुकान के बाहर लगी नांदनुमा टंकियों को भरकर गायों का इंतजार करता है। उसकी दुकान के आसपास रोज 40-50 गायें प्यास बुझाने के लिए आती हैं। शमशाद को देखकर अहसास होता है कि इनसान होने की जरूरी शर्त हिंदू या गऊ उपासक होना बिल्कुल भी नहीं है।

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