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Monday, 4 April 2016

जयपुर : शहर में मेट्रो निर्माण के लिए तोडे गए मंदिरों का मामला विधानसभा में जोर-शोर से उठा ।








जयपुर :  विधायक घनश्याम तिवाडी ने सीएमओ, मुख्यमंत्री सचिव, तत्कालीन पुलिस कमिश्नर श्रीनिवास राव जंगा और अन्य अधिकारीयोंपर आरोप लगाया कि, इन लोगों के निर्देशन में मंदिरों पर एेसे आरी चलाई गई, जैसे औरंगजेब ने मंदिरों को घेरा था । इस मामले में विपक्ष के सदस्यों ने भी सरकार को घेरा । इस समय नगरीय विकास मंत्री राजपाल सिंह ने माना कि, जिस धर्म और संस्कार से इन मंदिरों को हटाना चाहिए था, उसमें थोडी-बहुत कमी रही है ।

प्रश्नकाल में घनश्याम तिवाडी ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि, मेट्रो के नाम पर छोटी और बडी चौपड पर ऐसे मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया गया, जो स्वतंत्रता के पहले से स्थापित थे । शिवलिगों को आरी से काटा गया । आस्था के चलते कामगारों ने आरी चलाने से हाथ खडे कर दिए तो उनकी जगह दुसरे धर्म के लोग बुलाकर कार्रवाई कराई गई । दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए ।

नगरीय विकास मंत्री राजपाल सिंह शेखावत ने कहा कि, छोटी चौपड से हटाए गए छह में से रोजगारेश्वर और हनुमान मंदिर ही आजादी से पूर्व के थे । वर्ष २०११ से अब तक हटाए गए ११३ धार्मिक स्थलों में १०४ मंदिर, ९ मजारें हैं । सरकार की ओर से पुर्नस्थापित किए गए मंदिरों में धार्मिक विधि में कमी हो सकती है परंतु प्राण-प्रतिष्ठा विधिपूर्वक की गई । विधि विधान पांडित्य के साथ नहीं किया गया । उन्होंने कहा कि, मार्ग में बाधक बने मंदिरों को हटाने की परम्परा रही है । एेसे राजा को राज करने का कोई अधिकार नहीं है, जिसके राज में मार्ग में मंदिर आते हो ।

शेखावत ने कहा, मेट्रो परियोजना राजनीतिक इच्छा पर निर्भर नहीं थी । मंदिर हटाने का निर्णय तत्कालीन कैबिनेट के निर्णय पर हुआ ।

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