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Saturday, 9 April 2016

एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड में कोई गहरा राज छिपा है।


✍ एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड में कोई गहरा राज छिपा है। डीजीपी जावीद अहमद का बिजनौर दौरा गुत्थी को सुलझाने की बजाय और उलझा गया है। सवाल खड़ा हो गया है, डीजीपी क्यों आए थे, क्या किया और खाली हाथ क्यों लौट गए ?
तंजील अहमद की शनिवार 2 अप्रैल को देर रात सहसपुर में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। मंगलवार को सहसपुर आए एडीजी (लॉ एंड आर्डर) दलजीत सिंह चौधरी ने मामले में लोकल कनेक्शन जरूर होने की बात भी कही थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि शुक्रवार को अपने बिजनौर दौरे के दौरान डीजीपी जावीद अहमद तंजील हत्याकांड में कोई अहम जानकारी देंगे।
लेकिन, हत्या के छह दिन बाद भी उन्होंने अभी भी जांच ही चलने और कोई गिरफ्तारी नहीं होने की बात कही। जिस तरह से वह मीडिया के सवालों से बचकर निकल गए, उससे इस बात को बल मिल रहा है कि तंजील अहमद की हत्या के पीछे कहीं कोई गहरा राज तो नहीं छिपा हुआ है।
एनआईए में स्थापना के समय से ही तंजील अहमद डेपुटेशन पर तैनात थे। उन्होंने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण केस पर काम किया था। दूसरे जिस तरह वारदात के समय केवल उनको निशाना बनाया गया, उससे साफ है कि हमलावरों का मुख्य टारगेट तंजील अहमद ही थे। उनकी पत्नी फरजाना को केवल इसलिए गोली लगी, क्योंकि शूटआउट के समय वह उनके बराबर में बैठी हुई थीं।
फिलहाल वह जिंदगी-मौत से जूझ रही है। उनके दोनों बच्चे सीट के नीचे छिप गए और सुरक्षित है। वारदात के लिए की गई जबरदस्त प्लानिंग को देखकर अधिकारी दबी जुबान में आतंकी गतिविधि होने को साफ-साफ स्वीकार नहीं कर रहे थे। प्रापर्टी के विवाद या व्यक्तिगत दुश्मनी में हमलावर बच्चों और पत्नी को भी निशाना बना सकते थे लेकिन इसी बीच गुरुवार को इस बात की भी चर्चा रही थी कि एनआईए ने यूपी पुलिस की अब तक की थ्योरी को नकार दिया।
साथ ही तंजील अहमद के परिजनों और सहसपुर के निवासियों ने भी पुलिस की थ्योरी पर यकीन नहीं जताया। यूपी की एटीएस, एसटीएफ और पुलिस ने इस मामले में जो जांच की थी उसके बाद शुक्रवार को डीजीपी जावीद अहमद के आने की सूचना ने उम्मीद जगाई कि वे खुलासा कर देंगे। ऐसा होना तो दूर उन्होंने कोई महत्वपूर्ण जानकारी तक नहीं दी।
जाहिर है कि जिस तरह से डीजीपी जावीद अहमद ने कहा कि अभी तक इस मामले में न कोई गिरफ्तारी हुई है और न कोई हिरासत में है। केवल करीब 100 लोगों से पूछताछ हुई है। उससे लगता है कि डीजीपी अब तक की हुई पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं है। अब जांच नए पहलुओं पर की जाएगी। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर हत्याकांड प्रापर्टी और पर्सनल पर आधारित नहीं है, तो क्या इसके पीछे कोई गहरा राज छिपा है। हालांकि, डीजीपी ने हत्याकांड का कारण प्रापर्टी और पर्सनल नहीं होने की बात भी नहीं स्वीकारी।
अहम कड़ी गिरफ्त से दूर
इस मामले में सबसे ज्यादा नाम मुनीर का उछला। किसी पुलिस अधिकारी ने हालांकि उसके नाम की पुष्टि नहीं की, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्र उसको ही आरोपी बताते रहे। पूछताछ के लिए भी उसका नहीं मिल पाना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। वह पिछले लंबे समय से पुलिस से फरार है। पांच हजार का इनामी है। बताया जाता है कि वह मोबाइल का प्रयोग नहीं करता, इसलिए उसका पता लगाना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
परिजनों ने कहा, नहीं है कोई प्रापर्टी
बताया गया है कि तंजील अहमद के परिजनों ने पुलिस की थ्योरी से असहमति जताते हुए कहा कि उनका कोई प्रापर्टी विवाद नहीं है। शुक्रवार को तंजील के परिजनों ने बिजनौर पुलिस लाइन में डीजीपी से मुलाकात भी की। इससे पहले उन्होंने साफ कहा कि तंजील का कोई प्रापर्टी विवाद नहीं था। उन्होंने कहा कि पुलिस थ्योरी के अनुसार जो व्यक्ति हत्याकांड का मास्टरमाइंड है, उससे अभी तक पूछताछ ही नहीं हुई है। ऐसे में उसको मास्टरमाइंड कैसे बताया जा रहा है। जिस व्यक्ति को बाइकर्स बताया जा रहा है, वह तंजील का रिश्तेदार है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।इमरान उस्मानी एस के के न्यूज़ स्योहारा 9/4/16/

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