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Friday, 8 April 2016

उर्दू अदब का एक चिराग़ कह गया दुनिया को अलविदा



बदन पर हैं ख़राशें ही ख़राशें,
मगर चेहरा सजाया जा रहा है।
फ़रीद नोमानी
उर्दू अदब की दुनिया का एक ऐसा नाम जिसने रामपुर उत्तर प्रदेश की सरज़मी से नज़्म,गज़ल,शेर
 हर चीज़ मे एक अलग ही मुक़ाम हासिल किया जिसने न जाने कितने खूबसूरत अशआर कहकर
 लोगो को अपने हुनर का कायल किया वो नाम हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कहकर चला
गया लेकिन हमेशा जिसकी शायरी जिसकी फ़िक्र जिसकी सोच जिसकी इस्लाहइस्लाह हमारे बीच
जिन्दा रहेगी उस शख्स को दुनिया फ़रीद नोमानी के नाम से जानती है ।जिन्होंने दशको तक अपनी
शायरी के ज़रिये उर्दू अदब के चाहने वालों के दिलो पर हुक़ूमत की ।

बेहतर है कोई बात बनाकर समेट ले।
अच्छी हवा नहीं है अभी पर समेट ले।

अहले ख़िरद अब अपनी हदों में नहीं फ़रीद,
तू भी अब आस पास के पत्थर समेट ले।

मुरादाबाद से रहा गहरा लगाव , फ़रीद नोमानी की रूह मे बसता था मुरादाबाद मुरादाबाद कृषि प्रदर्शनी
 (जिगर मंच)पर अनगिनत मुशायरों मे शिरक़त की तो वही ठाकुरद्वारा मुरादाबाद की अदबी अंजुमन
आईना ,अदबी अंजुमन नई रौशनी की नशिस्त मुशायरों मे शिरक़त की ।इस दौरान ठाकुरद्वारा के नए
 उभरते शायरो को ढेर सारी मुबारकबाद के साथ साथ इस्लाह करते थे जिसे फ़रीद नोमानी के दुनिया
 से जाने के बाद याद करते हुऐ लोगो की आँखे भर आती है।

यूँ भी हर शख़्स मिरा यार नहीं हो सकता।
आदमी हूँ मैं अदाकार नहीं हो सकता।
अपने अनजान बनें और मुझे तकलीफ़ न हो,
मैं कभी इतना समझदार नहीं हो सकता।
फ़रीद नोमानी

ज़िन्दगी के सफ़र मे रहा भारी संघर्ष,

फ़रीद नोमानी साहब ने ज़िन्दगी में काफ़ी मुश्किल वक़्त का सामना किया । सालों तक नोकरी पाने
की जद्दोजहद के दौरान हालात ने उन्हें फ़रीद नोमानी से रुस्तम रामपुरी ( मज़ाहिया शायर)बनने के
लिये मजबूर कर दिया लेकिन फ़रीद साहब ने इसमें भी अपने फ़न के आगे लोगो को दाद देने के
 लिये मजबूर कर दिया।

गुरुवार 7 अप्रैल को दफ़्तर से घर जाते वक़्त फ़रीद नोमानी साहब का रास्ते मे ही हार्ट अटेक की
वजह से इन्तकाल हो गया जिसके बाद फ़रीद नोमानी साहब के चाहने वालों मे ग़म की लहर दौड़
गयी लोगो ने नम आँखों से उन्हें सुपुर्दे ख़ाक किया।
उर्दू अदब के इस महान नाम को आख़री सलाम जो लोगो के ज़हन मे हमेशा जिन्दा रहेगा।



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