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Tuesday, 3 May 2016

मासूम के दिल मे छेद ऊपर से गरीबी ,नही हो पा रहा इलाज मदद करने वाले हाथों का इंतज़ार


कहते हैं बच्चे भगवान का रूप होते हैं। हंसता-खिलखिलाता बचपन किसे नहीं अच्छा लगता। पुरानी कहावत है उपर ‘वाला गरीबी दे पर बीमारी ना दे’। कुछ ऐसे ही मामले से आज हम आपको रूबरू कराएंगे।

58 साल की बुजुर्ग महिला संतोष देवी पत्नी पुष्पेन्द्र ने अपनी आपबीती सुनाई। संतोष देवी का घर बिजनौर जनपद के स्योहारा के हिन्दू चौधरियान पीर का बाज़ार स्योहार में है। तीन बेटियों व तीन बेटों में से दो बेटियों व दो बेटो की शादी कर दी है। एक बेटे की शादी लगभग तीन साल पहले की थी जिसकी बीवी को आपरेशन के बाद उपर वाले ने एक बेटा अता किया। बेटे के होने की ख़ुशी में सभी परिजन फुले नही समा रहे थे उनकी ये ख़ुशी कुछ ही देर में उस समय मायूसी में बदल गई। जब यह नौ-निहाल पैदा होने के कुछ देर बाद ही नीला पड़ गया।

जच्चा-बच्चा अभी मुरादाबाद के एक अस्पताल में ही थे, उन्होंने इसकी सूचना वहां के डाक्टर को दी।  डाक्टर ने बच्चे को देखा उसका पूरा चेकअप किया और उदासी भरे लफ्जो में बच्चे के परिजनों को बताया की आपके बच्चे के दिल में छेद है और इसका दिल सही से काम नही कर रहा।

ऐसी हालत में आपका बच्चा ज्यादा वक्त ज़िंदा नही रह सकता। आप इसे दिल्ली आल इंडिया मेडिकल इंस्टीटयूट में ले जाओ। डाक्टर की ये बात सुन परिजनों के होश उड़ गय।े सबसे बुरा हाल तो बच्चे की दादी का था जैसे तैसे बच्चे के परिजन बच्चे को लेकर आल इण्डिया अस्पताल पहुंचें। वहां बड़ी मन्नत करने के बाद बच्चे की पर्ची बनी।

फिर डाक्टर ने बच्चे की मुरादाबाद वाली सारी रिपोर्ट देखी और बच्चे का चेकअप किया तथा परिजनों से बच्चे के दिल का आपरेशन करने को कहा, जिसका खर्च लाखो रूपये होता है।

बच्चे के गरीब परिजन वहां से कुछ दिनों की दवाई ले अपने घर लौट आये तथा दवाई खत्म होने पर फिर दिल्ली जा कर दवाई ले आते है। डाक्टर हर बार उन्हें बच्चे का आपरेशन कराने की सलाह देते है।

बच्चे के परिजनों के पास जो लड़की की शादी के लिए पाई पैसा रखा था वो भी इस मासूम पर खर्च कर दिया और हर दिन हर पल इस दो साल के मासूम देख कभी हंसते है तो कभी रोते है। इसी के चलते अपनी गुरबत पर भी आंसू बहाते है।

मालूम हो की बच्चे का दादा एक मजदूर है जो लगभग 100-200 रूपये सुबह से शाम तक मजदूरी कर अपने परिवार को लाकर देता है। तथा बच्चे का बाप भी एक गैस एजेंसी पर 4,000 रूपये महीना पर मजदूरी करता है।
वही बच्चे की दादी बच्चे के गम के साथ-साथ घर पर बैठी कुवारी बिटियाँ की शादी के लिए भी परेशान रहती है।
इस परिवार की तंगहाली की कहानी सुनकर दिल भर आता है। हालांकि आज भी दुनिया में ऐसे अनेक दानवीरो की भरमार है जिनकी तिजोरी में से एक दो लाख रुपया ऐसे जरूरत मन्दो पर खर्च हो जाए तो उस अलमारी में रखी दोलत में कोई कमी नजर नही आयेगी।

काश ऐसा ही कोई दानवीर इस ख़बर को पढ़कर इस परिवार की सुध ले और इस गरीब परिवार में जन्मे बच्चे के दिल के सुराग को भरने में अपना अहम रोल अदा करे।

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