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Tuesday, 17 May 2016

हां, मैंने और मेरी मां ने किया है ‘फ्री सेक्स


इन दिनों सोशल मीडिया पर फ्री सेक्स की बहस छिड़ी हुई है। इस बहस का मेन मुद्दा है सहमति से सेक्स या फिर फ्री सेक्स। एक महिला अधिकारी ने अपने फेसबुक पेज पर ‘नारीवादी इस पहल का मकसद लिंग आधारित छवि को तोड़ना है’ यह कोट किया और इसके साथ ही ये बहस शुरू हो गई।


सोशल मीडिया पर ये मुद्दा उठाया है ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमन एसोसिएशन की सेक्रेटरी और सीपीएम (एमएल) पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन और उनकी मां लक्ष्मी कृष्णन ने। इस पोस्ट में उन्होंने जेएनयू के शिक्षकों को भी निशाने पर लिया है।

जेएनयू के शिक्षकों ने 2015 में एक दस्‍तावेज तैयार किया था, जिसमें यूनिवर्सिटी के छात्रों को सेक्‍स और शराब से भरे जीवन के बारे में बताया गया था। पोस्‍ट में दावा किया गया है कि कविता ने एक टीवी चैनल की डिबेट में कहा कि यह अफसोस की बात है कि कुछ लोग ‘फ्री सेक्‍स’ (अपनी मर्जी से किसी भी व्‍यक्ति से शारीरिक संबंध बनाना) से डरते हैं।

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