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Tuesday, 10 May 2016

मोहब्बत करने वालो में ये झगड़ा डाल देती है


हिन्दुस्तान की शायरी को एक अलग मुकाम बख्शने वाला एक ऐसा तजुर्बेकार ,फिक्रमन्द, बेहद अच्छी सोच के ज़रिये शायरी को एक खूबसूरत अंदाज़ मे लोगो के ज़हन तक पहुँचाने वाला नाम जनाबे मुनव्वर राना जो अपनी शायरी के ज़रिये हिन्दुस्तान ही नही बाहरी मुल्कों मे भी अपने चाहने वालों के दिलों पर राज करते है।
पेश है मुनव्वर राना साहब के कुछ खूबसूरत अशआर


उदास रहने को अच्छा नही बताता है ,
कोई भी ज़ह़र को मीठा नही बताता है !
लिपट के देखिये इक रोज़ अपने दुश्मन से ,
ये तज़रुबा कोई अपना नही बताता है !
मोहब्बतों में जरूरी है बेबफाई भी ,
मगर इसे कोई अच्छा नही बताता है !
कल अपने आप को देखा था माँ की आँखों में ,
ये आइना हमें बूढ़ा नही बताता है.
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लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है,
मे उर्दू में गज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है।

उछलते खेलते बचपन मे बेटा ढूंढती होगी,
तब ही तो देखकर पोते को दादी मुस्कुराती है।

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मेरी थकन के हवाले बदलती रहती है,
मुसफिरत मेरे छाले बदलती रहती है।

मे ज़िन्दगी तुझे कब तक बचा के रक्खूंगा,
ये मौत रोज़ निवाले बदलती रहती है।

बड़ी अजीब है दुनिया तवायफों की तरह,
हमेशा चाहने वाले बदलती रहती है।

हमारी आरज़ू मासूम लड़कियों की तरह,
सहेलियों से दुशाले बदलती रहती है।

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मोहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है,
सियासत दोस्ती की जड़ मे मट्ठा डाल देती हे।

भटकती है हवस दिन रात सोने की दुकानों पर,
ग़रीबी कान छिद बाती है तिनका डाल देती है।

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बलन्दियों का बड़े से बड़ा मकाम छुआ,
मे माँ की गोद से उछला तो आसमान छुआ।।

                   ( मुनव्वर राना)

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