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Tuesday, 3 May 2016

आरटीआई की अवहेलना करने पर अधिकारियों पर ढाई लाख का जुर्माना


लखनऊ/मुरादाबाद। कुन्दरकी तहसील बिलारी निवासी राबिल हुसैन ने सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, मुरादाबाद से निम्न सूचनाएं मांगी थी कि वर्ष 2013-14 में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के वितरण सम्बन्धी सूचना की आवश्यकता है, जिसके अन्तर्गत छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति/मेन्टीनेस हेतु स्कूलों/मदरसों (प्राथमिक उच्च प्राथमिक तथा इंटरमीडिएट स्तर)/(प्रीमैट्रिक-पोस्ट मैट्रिक) के कितने आवेदन आये, किस-किस सेवा प्रदाता एजेंसी द्वारा डाटा फीडिंग करायी गयी तथा प्राप्त धनराशि को छात्र/छात्राओं के खाते में क्या सीधे भेजा गया है, कौन-कौन सी शैक्षणिक संस्था है, जिनके प्रबन्धक के खाते में धनराशि भेजी गयी है, धनराशि का विवरण, सी0डी0 सहित उपलब्ध कराये।  




हाफिज उस्मान,  राज्य सूचना आयुक्त

परन्तु विभाग द्वारा वादी को निम्नलिखित बिन्दुओं की सूचना नहीं दी गयी, निराश होकर वादी ने राज्य सूचना आयोग में आरटीआई एक्ट के तहत अपील दाखिल कर जानकारी प्राप्त करनी चाही है।

राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने जनसूचना अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, मुरादाबाद को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 20 (1) के तहत नोटिस जारी कर आदेशित किया कि वादी के प्रार्थना-पत्र में उठाये गये बिन्दुओं की सूचना 30 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से मा0 आयोग के समक्ष पेश करें, अन्यथा जनसूचना अधिकारी स्पष्टीकरण देंगे कि वादी को क्यों सूचना नहीं दी गयी है, क्यों न उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाये।

सुनवाई के दौरान मनोहर वरिष्ठ लिपिक, अल्पसंख्यक विभाग मुरादाबाद उपस्थित हुए। उन्होेने बताया कि वादी जिस प्रार्थना-पत्र की सूचना चाह रहे है, वह प्राप्त नहीं है, जब इस सम्बन्ध में वादी से पूछा गया तो उन्होंने रजिस्टर्ड डाक की प्रति सुबूत के तौर पर मा0 आयोग के समक्ष पेश किया, जिससे प्रतीत होता है कि आवेदन-पत्र कार्यालय में उपलब्ध कराया गया है।

राज्य सूचना आयुक्त ने सूचना अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 18 (2) के तहत जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, मुरादाबाद को निदेर्शित किया कि सम्बन्धित प्रकरण में जांच करें, कि वादी ने आरटीआई का आवेदन जो विभाग को दिया है, वह किस पटल सहायक के पास था, जिससे वादी को सूचना देने में विलम्ब हुआ है, दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए, मा0 आयोग को अवगत कराये।

शुभम श्रीवास्तव अल्पसंख्यक विभाग, मुरादाबाद ने मा0 आयोग के समक्ष लिखित तौर पर बताया है कि डाटा फिडिंग एजेन्सी मैसर्स आईटी ट्रेक्र्स, मुरादाबाद द्वारा कराया गया, जिसकी प्रति कार्यालय में मौजूद है। सरकार द्वारा वर्ष 2013-14 में रू0 34,05,38,800 का आवंटन किया गया। उक्त आवंटित धनराशि में से रू0 23,65,99,400 व्यय कर लिया गया है। छात्रवृत्ति छात्रों को वितरित की गयी है, इस आशय की जानकारी प्रतिवादी ने मा0 आयोग को दी है, जो पटल पर मौजूद है।

सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने आरटीआई की अवहेलना करने पर  रू. 2,50,000 - का दण्ड लगाया है

हाफिज उस्मान राज्य सूचना आयुक्त, द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत जिन अधिकारियों को शोकाज नोटिस जारी किया गया था कि वादी को 30 दिन के अन्दर अनिवार्य तौर पर सूचना उपलब्ध करायें, 30 दिन के अन्दर सूचना देना नियम के तहत अनिवार्य है।

अधिनियम की धारा 19 (7) के तहत आयोग का आदेश बाध्यकारी भी है। इसलिए जिन अधिकारियों ने आयोग के आदेश की अवहेलना की है, न तो उन्होनें सूचना दी है और न ही आयोग में उपस्थित हुए, उन्हें दोषी मानते हुए 25000/-रू0 25000/-रू0 का दण्ड लगाया गया है, वह इस प्रकार हैः-

1.  ज0सू0अ0, एसा0डी0एम0, मुरादाबाद।

2. तहसीलदार तहसील सदर, मुरादाबाद।

3. अधिशासी अभियन्ता विद्युत नगरीय वितरण खण्ड प्रथम, मुरादाबाद।

4. प्रभारी अधिकारी, खनन कलेक्ट्रेट, अम्बेडकरनगर।

5. जिला समाज कल्याण अधिकारी, मुरादाबाद।

6. सहायक निदेशक, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग नि0, मुरादाबाद।

7. विकलांग प्रकोष्ठ समाज कल्याण विभाग, मुजफ्फरनगर।

8. खण्ड विकास अधिकारी, विकास खण्ड मुढापाण्डे, मुरादाबाद।

9. ग्राम विकास अधिकारी, सीमला छजलैट, मुरादाबाद।

10. ग्राम पंचायत अधिकारी, मुडिया मलूकपुर, मुरादाबाद।

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