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Monday, 9 May 2016

महसूस ये होता है के हम टूट रहे है


उत्तर प्रदेश जिगर मुरादाबादी के खूबसूरत शहर मुरादाबाद का उर्दू अदब की दुनिया से वास्ता रखने वाला एक ऐसा नाम जिसे मुल्क़ ही नही सारी दुनिया मंसूर उस्मानी के नाम से जानतीजानती है।एक ऐसा नाम जिसकी शायरी किसी पहचान की मोहताज़ नही जिसकी शायरी लोगो के दिलों पर हकुमत करती है पेश है जनाब मंसूर उस्मानी के कुछ खूबसूरत अशआर----


हौसला ग़म का यूँ बढ़ाया कर।
आँखें भीगे तो मुस्कराया कर।

भूल जाऊँ मैं सारी दुनिया को,
इतनी शिद्दत से याद आया कर।

ज़ख़्म दिल के दुहाई देने लगें,
बात इतनी भी मत बढ़ाया कर।
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शाह दरबार तक नही पहुँचा,
इश्क इज़हार तक नही पहुँचा।

उनसे बातें तो ख़ूब की लेकिन,
सिलसिला प्यार तक नही पहुँचा।

चारागर भी इलाज पा जातें
ज़हर बीमार तक नही पहुँचा।
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हर रोज़ नई तरह के ग़म फूट रहें है,
महसूस ये होता है कि हम टूट रहें है।
वो ज़ुल्म भी इस दौर के इंसा पे हुआ है,
जिस ज़ुल्म को लिखने मे क़लम टूट रहें है।


      जनाबे-मंसूर उस्मानी



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