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Monday, 9 May 2016

कोई हाथों से निकला जा रहा है।


जिधर जाने से दिल कतरा रहा है।
उसी जानिब को रस्ता जा रहा है।

किसी का साथ पाने की ललक में,
कोई हाथों से निकला जा रहा है।

जिसे महसूस करना चाहिए था,
उसे आँखों से देखा जा रहा है।

वसीम बरेलवी

'' में जब घर छोड़ कर निकला तो ये कैसी तमन्ना थी।
कोई आये मुझे रोके मनाकर मुझको ले जाये ।।
                       
                       (प्रो, वसीम बरेलवी)


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