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Thursday, 1 September 2016

8 अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी देने के बाद भी कोच इमरान के पास नही बेटी की शादी के लिए पैसे


गोरखपुर। गोरखपुर में फर्टिलाइजर में स्‍पोर्ट्स कोटे से नौकरी पाने वाले हॉकी खिलाड़ी इमरान वर्ष 1974 में रोजी-रोटी की तलाश में जौनपुर से यहां आए तो यहीं के होकर रह गए। हॉकी के जादूगर मेजर ध्‍यान चंद और केडी सिंह बाबू के शिष्‍य रहे इमरान उन्‍हें आज भी अपना आदर्श मानते हैं।

न्यूज़ २४ के अनुसार इमरान बताते हैं कि दादा मेजर ध्‍यान चंद उनसे कहते थे कि जीवन भर हॉकी की सेवा करना और बच्‍चों को नि:शुल्‍क हॉकी सिखाना, देश के इस राष्‍ट्रीय खेल में दुनिया में पहले स्‍थान पर पहुंचाना। यही वजह है कि वह उनके आदेश का आज तक पालन कर रहे हैं। उनके लिए जीना भी हॉकी है और मरना भी हॉकी ही है। उन्होंने कहा कि जब तक सांसे चलेंगी तब तक हॉकी की सेवा करते रहेंगे।

उन्होंने फर्टिलाइजर कैम्पस में 10 मई 1987 से बच्चों को निशुल्‍क हॉकी सिखाना शुरू किया। भारतीय महिला हॉकी टीम की वाइस कैप्टन रहीं निधि खुल्‍लर, संजू ओझा, रजनी चौधरी, रीता पांडेय, प्रवीन शर्मा, सनवर अली, जनार्दन गुप्‍ता और प्रतिभा चौधरी जैसे कई दिग्गज खिलाड़ियों ने उनसे हॉकी का जादू सीखने के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

इमरान के शिष्‍य और उनके सहायक कोच जावेद बताते हैं कि जब तक फर्टिलाइजर चला तब तक गुरुजी किसी भी परेशानी में नहीं थे, लेकिन वर्ष 2002 में फर्टिलाइजर बंद होने के बाद से उनके मुफलिसी के दिन शुरू हो गए। आज जिस गुरु को कई पुरस्‍कार और सम्‍मान मिलने चाहिए थे, वह बेटी की शादी के लिए साइकिल पर स्‍पोर्ट्स किट रखकर घर-घर बेचने को मजबूर हैं। वहीं वर्ष 2002 से गुरु इमरान से हॉकी सीख रहे उनके शिष्‍य और नेशलन कैंप कर चुके विनोद मिश्रा बताते हैं कि यहां से कई राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के खिलाड़ी निकल चुके हैं। इस ग्राउंड से निकलने वाले खिलाड़ी देश्‍ा के हर संस्‍थान में मिलेंगे। दोनों का कहना है कि ऐसे गुरु जिसने सैंकड़ों राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय खिलाड़ी देश को दिए हैं, उसे द्रोणाचार्य और खेल रत्‍न पुरस्‍कार मिलना तो दूर केंद्र और राज्‍य सरकार ने उनकी कोई कद्र नहीं की।

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