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Friday, 30 September 2016

लखनऊ-महमूद मदनी और तौक़ीर रज़ा ने किया मंच साँझा,कहा क़ौम को इत्तेहाद की ज़रूरत


लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के रिफाह ए आम कलब के ऐतिहासिक मैदान में मुसलमानों के देवबंदी, बरेलवी मसलक के दो अहम हस्तियों ने मौजूदा मिल्ली मसायल के हल के लिये तमाम मसलकी इक्तिलाफ से ऊपर उठ कर मुत्ताहिद होने की दावत दी।

जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय  महासचिव मौलाना महमूद  मदनी ने मौलाना तौकीर रजा खां का शुक्रिया अदा करते हुये कहा कि हम सब को मौलाना की इस कोशिश की हिमायत करनी चाहिए कि हमारे बीच में मसलको से हट कर  मिल्ली मसायल पर एक जुट होने का तारीखी कदम उठाया है।

मौलाना मदनी ने कहा कि हर मुस्लमान अपने अकीदे और मसलक पर कायम रहते हुये मिल्ली मसायल पर एक जुटता का परिचय दे यही वक्त की जरूरत है। और मौलाना तौकीर रजा सहाब ने जो कदम उठाया है उसके लिये मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं और अपील करता हूं कि उनकी इस कोशिश को कामयाब करने के लिये उनका साथ दें।

साथ ही मौलाना मदनी ने हुकूमतों को चेताया कि हम मुसलमान अब अपना हक़ खूद हासिल करेंगें,,,और वफादारी व संविधान की पासदारी के साथ अपने सांवैधनिक हकूक़ को पा कर रहेंगें..

बरेली से आयेे मौलाना, तौकीर रजा खाँ ने कहा कि मसलक का इख्तिलाफ़ हमारे घर का मामला है इसे बाहर न जाने दो। उन्होंने ने कहा कि हम मसलकी ऐतबार से मुत्तहिद नही हो सकते तो मिल्ली मसायल पर तो इत्तिहाद कायम कर ही सकते हैं। और आज अगर हम मुत्तहिद नही हुये और इसी तरह फिरकों मे बटे रहे तो वह दिन दूर नहीं कि हर कोई मारा जायेगा।

आज हमें हमारी दुश्मन ताकतें सिर्फ मुसलमान समझ कर हम पर जुल्म कर रही हैं और हम हैं कि मसलको में बंटे हैं। मौलाना तौक़ीर रजा ने कहा कि आज हिन्दुस्तान की सभी कौमें फिरकों और जातियों में बंटी हुई है लेकिन जिस तरह हम लड रहें हैं शायद कोई और कौम इस तरह नही लड रही है वह अपने साथ हो रहे न इन्साफी, जुल्म और हक के लिए सारे इक्तिलाफ को भूल कर एक जुट हो जाते हैं लेकिन हमारी खुद गर्जी इस तरह बढ गई है कि हम मारे तो जाते हैं लेकिन अपने इत्तिहाद का सुबूत नहीं देते।

मौलाना ने अपने देवबंद के दौरे का जिक्र करते हुये कहा कि हमने इस बात कि परवाह नही किया कि हमारे मसलकी इक्तिलाफात के कारण वंहा जाने पर मेरे साथ बेहतर बर्ताव किया जायेगा या फिर दुतकारा जायेगा बल्कि हमने कौम का काम समझ कर अल्लाह के भरोसे कदम आगे बढाया और अल्लाह ने मेरे अमल को कुबूल फरमाया और देवबंद के जिम्मेदारो ने मुझे गले लगाया क्योंकि  उन को भी इस बात की फिक्र थी कि आज सारे इख्लाफात के बंधन टूटने चाहिये।लेकिन मौलाना ने शिकायत की क्या देवबंद के जिम्मेदारो की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि जिस तरह मैं देवबंद गया वही पैगाम लेकर वह भी बरेली आयें?

कार्यक्रम की सदारत नदवतुल उलमा के मोहतमिम मौलाना सईदुर्रहमान आज़मी ने की.
कार्यक्रम में मौलाना मतीनुल हक़ उसामा कासमी शहर काज़ी कानपूर ने कहा कि मुसलमानों को अपनी डिकशनरी से मायूसी का लफ्ज़ निकाल देना चाहिये और अपने भारतीय होने का सुबूत देने के लिये नामनिहाद देशभक्तों के दरबार में नहीं जाना चाहिये.

अलीगढ़ से आये वरिष्ठ मेहमान प्रोफेसर शकील समदानी,ने तालीम और आरक्षण पर लम्बी बातचीत की और आबादी के मुताबिक़ मुसलमानों को कम से कम 9% रिजर्वेशन देने की वकालत की. मौलाना सईद अत़हर कासमी ने समाजवादी हुकूमत द्वारा मुसलमानों पर किये गये ज़ुल्म का जि़क्र किया.

साथ ही  रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट शुएब,डा़.नदीम अशरफ़.मौलाना कौसर नदवी,मौलाना सुहैब नदवी,मौलाना जहांगीर आलम कासमी, इत्यादि ने भी अपनी बात रखी। देर रात ख़त्म हुए इस प्रोग्राम को कामयाब बनाने में तहरीक ए उमर के सदर और प्रोग्राम के कन्वीनर मैलाना सईद अत़हर का़समी,सैय्यद आरिफ़ मुस्तफा,नवेद अहमद, आदि ने अहम भुमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन नौजवान लेखक,समाजसेवी,  मौलाना मेहदी हसन एैनी कासमी ने किया।

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