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Sunday, 11 September 2016

शहाबुद्धीन की रिहाई की खबर के बाद... इस घर में पसरा है मातम


नई दिल्ली(टीम डिजिटल): शहाबुद्दीन की रिहाई को लेकर बिहार के सीवान में हर कोई जश्न में डूबा है लेकिन एक आदमी के घर जैसे कुछ मातम सा पसरा हो... ये घर है चंदबाबू का जिनके दो बेटों का अपहरण कर उन्हें तेजाब से नहला कर उनकी हत्या कर दी गई थी।

16 अगस्त 2004 को सीवान के व्यापारी के 2 बेटों को आरजेडी के तत्कालीन सांसद शहाबुद्दीन ने अपने साथियों के साथ मिलकर यह खूनी खेल खेला था। चंदबाबू के दोनो ही लड़के सतीश राज और गिरीश राज की हत्या के बाद इनके तीसरे भाई और केस के इकलौते चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की भी हत्या कर दी गई थी।

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चंदाबाबू का कहना है कि शहाबुद्दीन को तेजाब कांड में ही उम्र कैद के बजाय फांसी होनी चाहिए थी, लेकिन उम्र कैद की सज़ा मिलने के बाद भी हाईकोर्ट ने शाहबुद्धीन को बेल देकर यह साबित कर दिया है कि प्रदेश में शहाबुद्दीन की सरकार है। ऐसे में उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नहीं है।

16 अगस्त 2004 को सीवान में दोहरे हत्याकांड और तेजाब का ऐसा मामला हुआ जिससे पूरा देश हिल गया। जिसके बाद मृतक के तीसरे भाई राजीव रौशन ने खुद को घटना का चश्मदीद गवाह बताते हुए पूरी घटना की सूचना कोर्ट में दी थी। उसके इस बयान पर पिछले वर्ष 11 दिसंबर को सिविल कोर्ट ने शहाबुद्दीन को दोषी बताते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई।

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लेकिन 16 जून 2014 को सीवान के डीएवी कॉलेज के पास चश्मदीद राजीव रौशन की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिसके बाद बुधवार को हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को बेल दी। अब शाहबुद्दीन जेल से बाहर हैं और उन्होंने उनका आतंक एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

मो. शहाबुद्दीन के पिता एसएम हसिबुल्लाह ने कहा कि बेटे को ज़मानत मिल गई है, अब बकरीद की खुशी दोगुनी हो गई है। शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने कहा कि हमें साहेब की रिहाई 2003 से ही इंतजार था कि वे घर कब आएंगे। 13 साल से ज्यादा हो गए। ऊपर वाले के घर में देर है, अंधेर नहीं।

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