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Friday, 30 September 2016

मुरादाबाद-हमको तो मुस्कुराये ज़माने गुज़र गऐ



 मुरादाबाद/ ठाकुरद्वारा- नगर मे संचलित अदबी अंजुमन नई रौशनी की जानिब से नगर के वार्ड नम्बर 13 मे एक शेरी नशिस्त का इनअकाद किया गया।जिसमे नगर के उभरते शायरों ने अपने खुबसूरत अशआर पेश कर सामाईन की ख़ूब दाद बटौरी।

जावेद फराज़ ने कहा
तेरे हाथों में हाथ है किसका?
तेरी ख़्वाहिश तो आख़िरी हम थे।

शाकिर हसन ने कहा
अब क्या बताये कैसा है हमसे बिछड़कर वो,
हमको तो मुस्कुराये ज़माने गुज़र गए।

ज़ीशान अजनबी ने कहा
निकल तो आये हैं हम उस गली से,
मगर हर सांस भारी हो रही है।।

वसीम अब्बासी ने कहा
किसकी आवाज़ मे ये राहत हे,
किसने बीमार को दवा दी है।।

नसीम अहमद नसीम ने कहा
इक बार देखा था फकत उनको ख़्वाब में,
ता उम्र मेरे दिल से उजाला नहीं गया।

अब्दुल्ला शाद ने कहा

रात होते ही ख्यालों से लिपट जाते हैं।
जैसे गेसू तेरे गालों से लिपट जाते हैं।

शाकिर अज़्म ने कहा
तेरे गालों पे जो तिल दिखाई देता है।
ये मेरा सिमटा हुआ दिल दिखाई देता है।

अहमद माहिर,याक़ूब उस्मानी,अकरम जमील आदि ने अपना कलाम पेश किया।निज़ामत शाकिर हसन और सदारत नईम हसन एड्वोकेट ने की।

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