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Saturday, 8 October 2016

हैदराबाद-68 दिनों के उपवास के बाद 13 साल की लड़की की मौत



हैदराबाद। हैदराबाद में 13 साल की एक लड़की की 68 दिन उपवास करने के बाद पिछले सप्‍ताह मौत हो गई। इस लड़की ने जैन परंपरा के मुताबिक पवित्र अवधि 'चौमासा' में उपवास रखा था।

कक्षा आठवीं में पढ़ने वाली आराधना को उसके उपवास पूरे करने के दो दिन बाद अस्‍पताल में भर्ती करवाना पड़ा जहां उसे दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। कम से कम 600 लोग उसे 'बाल तपस्‍वी' मानकर आराधना के अंतिम संस्‍कार में पहुंचे। शव यत्रा भी निकाली गई जिसे 'शोभ यात्रा' कहा जाता है जो कि उत्‍सव की निशानी है।

आराधना का परिवार ज्‍वेलरी बिजनेस चलता है और उनकी सिकंरदाबाद के पोट बाजार क्षेत्र में दुकान है। सवाल यहां खड़ा हो रहा है कि उन्‍होंने उसे स्‍कूल छोड़कर उपवास पर बैठने की अनुमति क्‍यों दी थी।

कम्‍यूनिटी की एक सदस्‍य लता जैन ने कहा ' जब खाना और यहां तक कि पीना भी छोड़ते तब गंभीर तपस्‍या करने के लिए लोगों को अभ्‍यास है। समुदाय बैठकों में उनकी सराहना, सम्‍मान और महिमा मंडन होता है। उन पर उपहारों की बौछार होती है। लेकिन इस मामले में वह बच्‍ची थी और यही मेरी आपत्ति है।'

नईदुनिया की खबर के अनुसार परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि आराधना ने पहले भी ऐसा ही उपवास 41 दिन तक किया था। आराधना के दादा माणेकचंद समधारिया ने कहा 'हमने कुछ नहीं छिपाया है। हर कोई जानता था कि आराधना उपवास कर रही थी। वे आए और उन्‍होंने उसके साथ सेल्‍फीज भी ली। अब कुछ लोग 68 दिन के उपवास करने देने को लेकर हम पर अंगुलियां उठा रहे हैं।'

68 दिन का उपवास खत्म होने के बाद अखबार में आराधना का जो विज्ञापन छपा था उसमें सिंकदराबाद इलाके के मंत्री पद्म राव गौड़ को 'पाराना' कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बताया गया था जो उपवास खत्म करने के बाद आयोजित किया जाता है। जहीराबाद के सांसद बीबी बाटिल भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

जैन धार्मिक नेताओं के अनुसार संथारा का आमतौर पर मतलब बुजुर्ग लोगों के लिए है जो कि अपनी जिंदगी जी चुके हैं और त्‍याग चाहते हैं।

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