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Saturday, 26 November 2016

भुखमरी की देखो मार मासूम को थमा दी ढपली ,पढ़ाई छोड़ बना भिखारी


(अश्मनी विश्नोई)स्योहारा।भूख कुछ भी  करा देगी ये वाक्य उस वक्त सच हुआ जब एक दस साल का मासूम सूरज अपना घर या जिला ही नहीँ  बल्कि प्रदेश छोड़ दूसरे प्रदेश भिखारी बन कर आया ।मासूम सूरज ने दो रोटी के लिए प्रदेश छोड़ दिया ओर पेट भरने के लिए ढपली हाथो मे ले ली ।मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश मे जिला बिजनौर के थाना स्योहारा  मे पेट भरने के लिए पहुँचा ।मासूम का कहना है कि उसके पिता अब इस दुनिया मे नहीँ है तो पेट कौन भरता बस दो रोटी के लिए दुकानो पर घरो मे ढपली बजा बजाकर पेट भर लेता हूँ।जब सूरज से पुछा गया कि पढ़ाई नहीँ की क्या तो उसने हँसते हुए कहा कि साहेब अभी भुखनहीँ देखी ।पढ़ने का मन तो था पर क्या करता पेट भी तो था ।हमारे नसीब मे तो बस ढपली ही है ।कलम तो बाबू लोग ही चलाते है ।इस वाक्य को सुन कर जो लोग सूरज के पास खड़े थे उनकी आखो मे आँसू बहने लगे लेकिन मासूम सूरज हँसता हुआ ढपली बजाता चला गया ।न जाने कितने मासूम रोज़ इसी  तरह सूरज बने घुमनते है ।क्या सरकार को नही दिखाई देते ये मासूम ।

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